Thursday, September 23, 2010

अपनी संतान का दुःख, अमरीकी अर्थव्यवस्था और एक संभावना


अपनी संतान का दुःख
एक छोटे सा बच्चे ने अपनी माँ से पूछा - माँ मैं कैसे पैदा हुआ कहां से आया।
तो माँ ने कहा “मैंने एक दिन थोड़ी सी मिट्टी ली, उसे एक मटके में डाला और ढंक कर रख दिया। कुछ दिन बाद मैंने ढक्कन हटाया तो मुझे तुम उसमें मिले।“
बच्चे को सारी जानकारी होने पर अपनी माँ की तरह ही किया। उसने मिट्टी ली उसे एक मटके में डाला और कुछ दिन के इंतजार के बाद ढक्कन उठाकर देखा तो पाया कि उसमें एक मेंढक बैठा था। बच्चे की आश्चर्य की सीमा ना रही उसने उसे हाथ में उठाया और देखने लगा, बातें करने लगा। लेकिन मेंढक को मौका मिला और वह कूद कर भागा। बच्चा मेंढक के पीछे-पीछे और मेंढक आगे-आगे।
बहुत देर तक बच्चा मेंढक का पीछा करता रहा पर उसके एक बिल में घुस जाने और हाथ में नहीं आने पर निराश होकर बोला - जी में तो आता है कि एक बड़ा सा पत्थर लूं और तुझे कुचल दूं - पर क्या करूं तू मेरी औलाद है ना।
------------x-----------------------------------------x------------------
अमरीकी अर्थव्यवस्था
अमरीका के एक मंत्री ने वेश्या के साथ कुकर्मरत पकड़े गये तो अदालत में उन्होंने अपनी सफाई में कहा - हुजूर मुझे 12000 डॉलर मिलते है अगर मैं घरेलू सामानों पर इन्हें खर्च करता हूं तो यह धन चाईना चला जाता है। अगर मैं पेट्रोल, डीजल या गैसोलीन पर खर्च करता हूं तो ये रकम अरब देशों में चली जाती है। अगर मैं कम्प्यूटर खरीदता हूँ तो यह रकम भारत में चली जाती है। यदि मैं फल सब्जियां खरीदता हूं तो इस राशि से मैक्सिको और हांडूरास जैसे देश अमीर होते हैं। अगर मैं कार खरीदता हूं तो जर्मनी को लाभ होता है। यहां तक कि यदि मैं एक बार इस्तेमाल होने वाला इलेक्ट्रानिक सामान भी खरीदता हूं तो यह डॉलर ताईवान में पास जाते हैं। अमरीकी डॉलर, अमरीका में रहे इसके दो ही उपाय हैं या तो मैं अपने देश में ही बनी बीयर शराब खरीदूं या अपने ही देश की वेश्याओं के पास जाऊं। शराब पीने की भी हद है तो जनाब जिस जुर्म में आपने मुझे पकड़ा है वह अपने देश की मुद्रा अपने ही देश में रखने का एकमात्र सर्वश्रैष्ठ उपाय है।
------------x-----------------------------------------x------------------

संभावना
रामखिलावन की भरी जवानी में मृत्यु होने पर उसकी बीवी रेखा मजूमदार ने अखबार में विज्ञापन निकाला।
मेरे पति के अंत्येष्टि, तेरहवीं आदि कार्यक्रमों में शामिल हुए महानुभावों का हार्दिक आभार।
विनीत - रेखा मजूमदार, कद 5 फुट 4 इंच, रंग-गोरा, शिक्षित, विवाहित ग्रहिणी पर बाल-बच्चे नहीं हैं।

Wednesday, September 22, 2010

बीवी कि‍सकी है ? इश्‍क कमीना और संता की सफाई।

बीवी के साथ हमेशा प्‍यार करो 
बीवी को बाहर खाना खि‍लाने ले जाओ 
बीवी के साथ ईमानदार रहकर उसे खुश रखो 
ये मत सोचो..........
कि‍ बीवी कि‍सकी है। 
-------------------------------

एक युवक अपनी प्रेमिका से मिलने, अकेले में उसके घर पर पहुंचा! प्यार मोहब्बत की बातें चल ही रहीं थी नौकरानी आ गई, वो युवक तेजी से बाहर निकला... ठहरा और नौकरानी को 10 का नोट देते हुए बोला - प्लीज किसी को बताना मत।
नौकरानी बोली - वैसे तो इस काम के, दूसरों से मैं 100 रू. लेती हूं पर तुम नये हो इसलिए 10 रू ही रख लेती हूं।
-------------------------------

बीमार संता, संतानी से बोला - अब की मुझे जानवरों के डॉक्टर के पास ही ले जाना, उसी के इलाज से फर्क पड़ पायेगा।
संतानी - क्यों जी ऐसा क्यों कह रहे हो?
संता - सुबह मुर्गे की तरह उठ जाता हूं, दिन भर घोड़े की तरह यहां वहां भाग दौड़ करता हूं, दफ्तर में लोग गधे की तरह जोतते हैं, शाम को लौट कर परेशानहाल तुम सब पर कुत्ते की तरह भौंकता हूं... और रात गये एक भैंस के साथ सो जाता हूँ - ऐसे आदमी का इलाज जानवरों का डॉक्टर  ही कर सकता है।

Monday, September 20, 2010

जि‍ज्ञासा को इन्‍ि‍द्रयों से ना टटोलें

टीचर डे स्पेशल

तीन छात्र शिक्षक के जन्मदिन मनाने उसके घर गये। जन्मदिन मनाया गया तोहफे दिये गये।
पहले छात्र का उपहार देखते समय शिक्षक ने अंदाजा लगाया कि इसके पिता जी की टॉफि‍यों गोलियों की दुकान है और बोले - रमन बेटा मैं जानता हूं ये जरूर चॉकलेट का पैकेट है।
रमन बोला - हाँ।
दूसरे छात्र का तोहफा टटोलते हुए शिक्षक ने अंदाजा लगाया कि इसके पिता जी फूलों की दुकान पर काम करते हैं। उन्होंने पैकेट को सूंघा और बोले - तो तुम गुलदस्ता लेकर आये हो।
राम बोला - हाँ।
शिक्षक के सभी अंदाजे बिना तोहफा खोले ही सही निकल रहे थे।
शिक्षक ने तीसरे छात्र गेंदालाल का पैकेट देखा और उसे सूंघा, उन्होंने देखा कि पैकेट के एक कोने से पीले पानी जैसा द्रव्य गिरा। शिक्षक ने सोचा इसके पिता तो ठेके पर काम करते हैं हो न हो कोई मंहगी शराब हो। उन्होंने उस द्रव्य को चखा और बोले तो तुम - मंहगी बीयर लेकर आये हो।
तीसरा छात्र बोला - नहीं।
शिक्षक तो - रशियन वोदका होगी।
छात्र पुनः बोला - नहीं।
अब शिक्षक परेशान हो गया और उसने हैरानी से पूछा - तो तुम क्या लेकर आये हो गेंदालाल।
गेंदालाल - सर मैंने आपकी इच्छानुसार एक बहुत ही अच्छी नस्ल का कुत्ते का नन्हा सा पिल्ला गिफ्ट किया है।

Saturday, September 18, 2010

क्‍या आप अंडा खाने जा रहे हैं ?


संता (बंता से): बंता डियर खाना खाओगे?
बंता: क्यों कुछ खास पका है आज ?
संता - हाँ... बकरे की जुबान पकाई है।
बंता: मैं मुँह से निकली हुई चीज नहीं खाता।
संता: तो फिर अंडा बना दूँ।

Wednesday, September 15, 2010

उम्‍मीद पे दुनि‍यां कायम है।

पहला गधा: यार मेरा मालिक दिन भर काम लेता है, मारता है, खाना भी नहीं देता - बहुत तंग हूं।
दूसरा गधा: तो तू भाग क्यों नहीं जाता?
पहला गधा: भाग तो जाऊं... पर उस उम्मीद का क्या करूं?
दूसरा गधा: कौन सी उम्मीद ?
पहला गधा: मेरे मालिक की एक सुन्दर और जवान बेटी है, वो जब भी कोई शरारत करती है मेरा मालिक कहता है मैं तेरी शादी इस गधे से कर दूंगा।
===========================

चार दार्शनिक दुनियां की सबसे तेज चीज पर चर्चा कर रहे थे। 

बंता हड़बड़कर बोले - सबसे तेज पलक का झपकना है यही समय को मापने की इकाई भी है।

विपुल बैनर्जी बोले - नहीं जी, सबसे तेज विचार की गति है, आप एक खयाल पर ध्यान नहीं दे पाते कि दूसरा आ जाता है।

चैन्ना स्वामी बोले - सबसे तेज है विद्युत की गति। हम यहां स्विच दबाकर हजारों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष की चीजों को नियंत्रित कर सकते हैं।

जब संता अवधूत की बारी आयी तो बोले आप व्यर्थ की चर्चा कर रहे हैं। मैं आपको कल रात की अनुभव सिद्ध घटना बताता हूँ। आधी रात को मैं पेट में दर्द की वजह से उठा - मेरी आंख भी नहीं खुली , पलक भी नहीं झपकी , मुझे समझ भी नहीं आया कि कौन सा विचार चल रहा है, मैं लाइट ऑन करने के लिए स्विच की तरफ बढ़ा ही था कि.......... पजामे में ही.......... दस्त हो गये। इस प्रकार आंत्रशोध यानि दस्त की गति ही सर्वाधिक है।

Tuesday, September 14, 2010

महिला एवं पुरूष की इच्छाओं में अन्तर


महिला एवं पुरूष की इच्छाओं में अन्तर
सारी महिलाएं चाहती हैं उन्हें एक ऐसा पुरूष मिले जो उनकी हरेक इच्छा पूरी कर सके।
सारे पुरूष यह चाहते हैं कि उन्हें इतनी महिलाएं मिले कि बस एक ही इच्छा पूरी हो सके।

Sunday, September 12, 2010

लालू की अंग्रेजी...


लालू, राबड़ी और उनका पुत्र दक्षिण भारत की यात्रा से लौट रहे थे।
लालू निचली बर्थ, राबड़ी बीच वाली और पुत्र सबसे ऊपर बर्थ पर लेटे-बैठे यात्रा कर रहे थे।
बीच में एक स्टेशन आया जहां गाड़ी कुछ मिनटों के लिए रूकी।
लालू एवं उनका पुत्र नाश्ता पानी कर लौटे तो देखा एक मद्रासी उनके बेटे की सीट पर कब्जा कर सो गया है।
भड़के हुए लालू ने गुस्से में आकर टीटी को बुलाया और डॉंटने लगाने लगे पर टीटी भी दक्षिण भारतीय ही था।
टीटी बोला - अंग्रेजी बोलेगा... मैं समझेगा.. हिन्दी नी समझेगा।
मजबूरीवश लालू बोले :  
"That man sleeping on top of my wife is not giving birth to my child."