Monday, September 20, 2010

जि‍ज्ञासा को इन्‍ि‍द्रयों से ना टटोलें

टीचर डे स्पेशल

तीन छात्र शिक्षक के जन्मदिन मनाने उसके घर गये। जन्मदिन मनाया गया तोहफे दिये गये।
पहले छात्र का उपहार देखते समय शिक्षक ने अंदाजा लगाया कि इसके पिता जी की टॉफि‍यों गोलियों की दुकान है और बोले - रमन बेटा मैं जानता हूं ये जरूर चॉकलेट का पैकेट है।
रमन बोला - हाँ।
दूसरे छात्र का तोहफा टटोलते हुए शिक्षक ने अंदाजा लगाया कि इसके पिता जी फूलों की दुकान पर काम करते हैं। उन्होंने पैकेट को सूंघा और बोले - तो तुम गुलदस्ता लेकर आये हो।
राम बोला - हाँ।
शिक्षक के सभी अंदाजे बिना तोहफा खोले ही सही निकल रहे थे।
शिक्षक ने तीसरे छात्र गेंदालाल का पैकेट देखा और उसे सूंघा, उन्होंने देखा कि पैकेट के एक कोने से पीले पानी जैसा द्रव्य गिरा। शिक्षक ने सोचा इसके पिता तो ठेके पर काम करते हैं हो न हो कोई मंहगी शराब हो। उन्होंने उस द्रव्य को चखा और बोले तो तुम - मंहगी बीयर लेकर आये हो।
तीसरा छात्र बोला - नहीं।
शिक्षक तो - रशियन वोदका होगी।
छात्र पुनः बोला - नहीं।
अब शिक्षक परेशान हो गया और उसने हैरानी से पूछा - तो तुम क्या लेकर आये हो गेंदालाल।
गेंदालाल - सर मैंने आपकी इच्छानुसार एक बहुत ही अच्छी नस्ल का कुत्ते का नन्हा सा पिल्ला गिफ्ट किया है।

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