Thursday, February 3, 2011

खली के घर बच्‍चा और बच्‍चों की जि‍न्‍दगी


खली के घर में 10 साल बाद संतान हुई। बेटा पैदा हुआ। सारा परिवार खुश था। लोग बधाईयां गा रहे थे और मिठाईयां बांट रहे थे,  लेकिन खली का हाल ही और था ।
एक आदमी ने पूछा - भाई खली, इतने परेशान क्यों हो ? ऐसा लग रहा है बेटा पैदा होने की तुम्हें जरा भी खुशी नहीं।
खली बोला - एक तो दस साल बाद मेरी कोई औलाद हुई है, अब बच्चा हुआ है तो इतना छोटा .... बस बित्ते भर का, लोग कहीं मेरी बीवी पर शक ना करें कि ये बेटा मेरा ही है या....। मैं तो यही सोचकर परेशान हूं भाई।
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शिक्षक - अपने मां बाप का कहना मानोगे, उनके हिसाब से चलोगे
बच्चे - बिल्कुल मानंगे।
शिक्षक - बच्चों वचन दो की शराब, सिगरेट नहीं पियोगे।
बच्चे - नहीं पियेंगे
शिक्षक - स्कूल, कॉलेज बंक कर पिक्चर देखने या आवारागर्दी करने नहीं जाओगे।
बच्चे - नहीं जायेंगे।
शिक्षक - लड़कियों का पीछा नहीं करोगे, उन पर फब्तियां नहीं कसोगे।
बच्चे - नहीं करेंगे।
शिक्षक - समाज की सेवा करते हुए देश पर मर मिटोगे।
बच्चे - इतना सब आपके हिसाब से करने के बाद, जिन्दगी जीने लायक रह भी नहीं जायेगी, बिल्कुल मर मिटेंगे सर।

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जज - तुमने औरतों के सूट साड़ि‍यों की दुकान से कपड़े चुराये हैं, लेकि‍न तुमने कहा कि‍ तुम दुकान में 3 बार गये, ऐसा क्‍यों ?
 चोर - जज साहब, पहली दो बार में मैं जो सूट और साड़ि‍यां लेकर गया था, वो मेरी घरवाली को पसंद ही नहीं आये।

5 comments:

  1. बहुत सुन्दर हँसाने का प्रयास किया है आप ने
    और आप को मेरे ब्लॉग पर आने और मार्गदर्शन करने के लिए बहुत बहुत आभार
    आशा है इसी तरह आप से आगे भी मार्गदर्शन मिलता रहेगा
    बहुत बहुत धन्यवाद

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  2. हा हा हा …………बहुत बढिया।

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  3. मेरे पास बस एक ही शब्द है - मजा आ गया।

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  4. वाह वाह वाह एक सांस में पढ़ता ही चला गया...
    कृपया पेज का पृष्ठ भाग और हल्का रखिये तथा अक्षरों को अधिक डार्क रखिये साफ़ साफ़ समझ में नहीं आ रहा है
    हमारी शुभकामनाये आपके साथ है,

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