Tuesday, February 22, 2011

हास्‍य एक औषधि‍ है


अगर आप कि‍सी भी वि‍षय के संबंध में हास्‍य देख पा रहे हैं , तो यकीनन आप तथ्‍य के बहुत करीब पहुंच गये हैं। यदि‍ गंभीर वि‍चारण, चिंतन मनन में एक मुस्‍कुराहट चमकी है तो नि‍श्‍ि‍चत ही सत्‍य आपके आसपास ही कहीं नि‍कट है। गौतम बुद्ध हों या महावीर जब उन्‍हें ज्ञान प्राप्‍त हुआ होगा तो उनकी आंखों से आंसू नहीं नि‍कले, चेहरे पर मुस्‍कुराहट ही कौंधी होगी।

हास्य संक्रामक होता है। जब हँसी को सब लोगों में बांटा जाता है तो यह लोगों को दिलों को जोड़ती है, आत्मीयता को बढ़ाती है। आमोद-प्रमोद के क्षणों में हमारा मनोरंजन ही नहीं होता, बल्कि हास्य स्वास्थ्यकर शारीरिक परिवर्तनों का कारक भी बनता है। हास्य हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, दर्द को कर्म करता है, तनाव के विध्वंसक प्रभावों से रक्षा करता है, श्वांसों को ऊर्जा से आपूरित करता है। हास्य एक ऐसी औषधि है जो मजेदार है, इस्तेमाल में आसान है और सबसे बढ़कर यह निःशुल्क मिलती है। 
हास्य तन और मन के लिए अचूक औषधि है, तनाव, पीड़ा और द्वंद्व से बचने का अचूक अस्त्र है। एक रोगी भी स्वस्थ हास्य के माध्यम से अपनी बीमारी को बड़ी ही तेजी से पराजित कर पुनः स्वस्थ देह प्राप्त कर सकता है। हास्य जीवन के बोझों को हल्का कर देता है, हमारी आशाओं को प्रेरणा देता है, हमें अन्य लोगों से.. इंसानियत से जोड़ता है। हास्य में पुर्नजीवन की शक्ति है, बाधाओं से उबारने की क्षमता है, रिश्ते बनाने की सामर्थ्‍य है और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य नियमित रखने का गुण है।

हास्य के शारीरिक लाभ
हास्य सम्पूर्ण देह को शांत करता है।
1 अगर आप लगभग आधा घंटा खुलेमन से हंसे तो यह हँसी आपके शारीरिक तनाव को दूर कर मांसपेशियों को शांत कर देगी।
2 हास्य शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। हास्य तनाव पैदा करने वाले हार्मोन्स के उत्सर्जन को कम करता है और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले हार्मोन्स और संक्रमण से लड़ने वाले एन्टीबॉडीज के उत्सर्जन को बढ़ाता है।
3. हमारे शरीर के खुशनुमा महसूस कराने वाले हार्मोन्स का उत्सर्जन शुरू करने में हास्य एक बटन की तरह काम करता है। हास्य एन्डोर्फिन नामक रसायन पैदा करने में सहायक होता है।
4. हास्य दिल को सुरक्षित रखता है - हंसने से हमारी रक्तवाहिनियां में रक्त का प्रवाह सुधरता और नियमित होता है। रक्तप्रवाह बढ़ने से इन मांसपेशियों की कसरत हो जाती है और हार्टअटैक और रक्तवाहिनियों/ धमनियों की अन्य समस्याओं से भी बचा जा सकता है।

हास्य के मानसिक लाभ
1 हास्य से हमारे दिल ओ दिमाग में आक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जो दिल ओ दिमाग को ताजा करता है। 

2 हास्य हमारे जीवन में खुशी और जिंदादिली लाता है। 3 गुस्से और भय से मुक्त करता है।
4 तनाव को दूर करता है। 5 पुनःस्वास्थ्य प्राप्ति में सहायक है।

मानसिक स्वास्थ्य और हास्य में संबंध
1 हंसते हुए आप गुस्से, अवसाद और दुख का शिकार नहीं हो सकते।
2 हास्य हमें उर्जा, उत्साह का संचार करता है इससे किसी मुद्दे पर अधिक केन्द्रित होकर ध्यान दिया जा सकता है।
3 हास्य दृष्टिकोण बदल देता है - इससे आप किसी बात को अधिक यथार्थपूर्वक देख सकते हैं। 

4 हास्य समस्या और हमारे बीच एक मनोवैज्ञानिक दूरी बनाता है जिससे समस्या हमारे ऊपर हावी नहीं हो पाती और मुद्दे पर हमारी पकड़ मजबूत बनती है। किसी भी मुश्किल में प्रथमदृष्टया ही हताशा का भाव नहीं आता।

हास्य के सामाजिक लाभ
1 आत्मीयता बढ़ती है, रिश्ते मजबूत होते हैं। 2 दूसरे लोग हमारी तरफ आकर्षित होते हैं।
3 परस्पर वैमनस्य और संघर्ष का प्रतिरोधक है। 4 एकता पैदा करता है।
5 रिश्तों को ताजा, और चमत्कारी बनाने में सामूहिक हास्य अधिक प्रभावशाली होता है। किन्हीं बातों को गंभीरतापूर्वक रखने की बजाय हास्यपूर्ण माहौल में रखने पर वह हल्के फुल्के ढंग से ही निपट जाती हैं। हास्य दूसरों के पूर्वाग्रहों, असवेंदना, असहमति और बैरभाव को नष्ट करने वाला साबित हाता है।
6 भय के कारण दबे भाव भी हास्य की पृष्ठभूमि में सतह पर आकर स्पष्ट हो जाते हैं, कुंठाएं निकल जाती हैं। हार्दिक भावों के आदान प्रदान के लिए हास्यापूरित माहौल सर्वश्रेष्ठ है।
7 हास्य हमारी सोच को सकारात्मक रखता है, आशावादी बनाये रखता है, उत्साह और आत्मिक शक्ति को बढ़ाता है। मुश्किल से मुश्किल हालातों में भी हास्य की एक छोटी सी फुलझड़ी सारे बोझिल माहौल को खुशनुमा बना सकती है।
 

हास्य और लोगों से हमारे रिश्ते
सहकर्मियों, परिवारिक सदस्यों और मित्रों से व्यवहार में हास्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हँसना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। जन्म के कुछ दिनों बाद ही शिशु मुस्कुराने लगता है। शिशु के कुछ महीनों बाद की किलकारियां, रोतले से रोतले आदमी के चेहरे पर हँसी ला देती हैं।
 

फिर भी जीवन में जैसे जैसे व्यावसायिकता आदमी पर हावी होती जाती है वह हँसना भूल जाता है। स्त्री गृहस्थी में, पुरूष कार्यस्थलों पर दुनियां की कुटिलताओ में खो जाते हैं। ऐसी ही किन्हीं परिस्थतियों ने यदि आपके जीवन से भी हास्य को कपूर की तरह उड़ा दिया है तो इसे आमंत्रित कीजिए इन उपायों से :
मुस्कुराईये - मुस्कुराना, हँसने का पहला चरण है। हँसने की ही तरह मुस्कुराहट भी छूत की तरह होती है। आप जब भी किसी वस्तु या व्यक्ति की ओर देखें। अपने अधरों पर स्मित लायें, देखें कि चेहरे पर सहज-शांत सौम्यता रहे।
खुशनुमा यादों को किसी कागज पर उतारिये - अच्छे खुशनुमा दिनों की यादें आपके चेहरे पर मुस्कुराहटें और दिमाग में शरारतों की अंगड़ाइयों को पुनः जीवित कर देंगी।
सकारात्मकता हास्य की ओर ले जाती है और हास्य सकारात्मकता लाता है - इसलिए हास्यऔर सकारात्मकता का चोलीदामन का साथ है। तलाशिये की आपके नीरस-गंभीर जिन्दगी में, अभी यहीं आसपास ही कुछ मूर्खताभरा हो रहा है, जिसे देखते ही हँसी के झरने फूट निकलेंगे।
छोटे मोटे घरेलू और आसपास के स्थान पर घूमने जाना भी - माहौल को हल्का करता है। हंसना-खेलना भी जुड़ा है। खेलते वक्त भी आपकी ऊर्जा मुक्त होती हैं संवर्धित होती है, यही काम हास्य में भी होता है। 

दिन भर में कुछ समय मनोरंजक कार्यों और खुशमिजाज लोगों के साथ बितायें। खुशमिजाजी कुछ लोगों की प्रकृति ही होती है, ऐसे लोग जीवन की विद्रूपताओं में से हास्य ढूंढ लेना जानते हैं। ऐसे ही किन्हीं लोगों को ठहाके लगाते प्रश्न करें कि आज किस बेवकूफी पर हंसा जा रहा है और खुद को खिलखिलाने से ना रोकें। हास्य एक दृष्टिकोण है। किसी भी भाषा के उन शब्दों से, जिनसे एक से अधिक निकलते हैं, हास्य निसृत करने की परंपरा है। हर कर्मठ आदमी अपने जीवन में गलतियां करता है, और करते समय या तुरंत बाद में दुखी होता है... लेकिन यही गलतियां एक समय बाद .. किसी को कहानी के रूप में सुनाते वक्त हँसी का साधन बनती है। ऐसी गलतियों को जाहिर करने और दूसरों के अवचेतन से ऐसे हास्य को निकालने की सामथ्र्य सभी महापुरूषों में पाई जाती है।


"याद रखें पैदा होते समय आप रोये, आपके बस में नहीं था.... 
लेकिन आजीवन हँसना आप के वश में है।"

आज के लि‍ये खुराक 
कन्छेदी लाल: भोपाल स्टेशन से ट्रेन में बैठा। उसके बाद वो हर स्टेशन पर उतरता टिकट खरीदता और फिर ट्रेन में चढ़ जाता।
पास ही बैठे एक अन्य यात्री ने पूछा- तुम ही एक ही बार में जहां जाना है उस स्टेशन का टिकट क्यों नहीं ले लेते?
कन्छेदी लाल - क्योंकि मेरी बीमारी ही ऐसी है, डॉक्‍टर ने मना किया है लम्बी यात्रा के लिए।
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हनुमान जी के भक्त ब्रहमचारियों की एक मण्डली रामेश्वरम से तीर्थ यात्रा कर बस द्वारा वाया गोवा लौट रही थी। गोवा आने ही वाला था तो मण्डली का मुखिया बोला - इस स्थान से गुजरते समय 60 कि.मी. तक कुमारियां और युवतियां अर्धनग्न अवस्था में दिख सकती हैं इसलिए प्रिय शिष्यो ऐसा कोई भी दृश्य दिखने पर धर्मभ्रष्ट ना हो इसलिए हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दें, इससे तुम्हारा मन विचलित नहीं होगा।
चेतावनी के करीब 3-4 कि.मी. बाद एक ब्रम्हचारी ने हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर दिया।
सारी मण्डली में खुसरपुसर शुरू हो गई। उस ब्रम्हचारी के अगल बगल बैठे मित्र बोले - चालीसा ही पढ़ते जाओगे कि बताओगे भी... क्‍या है ? कहां हैं?

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चार दार्शनिक दुनियां की सबसे तेज चीज पर चर्चा कर रहे थे। 
बंता हड़बड़कर बोले - सबसे तेज पलक का झपकना है यही समय को मापने की इकाई भी है।
विपुल बैनर्जी बोले - नहीं जी, सबसे तेज विचार की गति है, आप एक खयाल पर ध्यान नहीं दे पाते कि दूसरा आ जाता है।
चैन्ना स्वामी बोले - सबसे तेज है विद्युत की गति। हम यहां स्विच दबाकर हजारों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष की चीजों को नियंत्रित कर सकते हैं।
जब संता अवधूत की बारी आयी तो बोले आप व्यर्थ की चर्चा कर रहे हैं। मैं आपको कल रात की अनुभव सिद्ध घटना बताता हूं। आधी रात को मैं पेट में दर्द की वजह से उठा - मेरी आंख भी नहीं खुली , पलक भी नहीं झपकी , मुझे समझ भी नहीं आया कि कौन सा विचार चल रहा है, मैं लाइट ऑन करने के लिए स्विच की तरफ बढ़ा ही था कि.......... पजामे में ही.......... । इस प्रकार आंत्रशोध यानि दस्त की गति ही सर्वाधिक है।

Friday, February 18, 2011

भौति‍कवादी चेलारमानी, नाक में उंगलि‍यां, एक बहरा और खून क्‍यों मैच करता है

अध्यापक: एक ऐसे व्यक्ति को क्या कहेंगे जिसे सुनाई ना देता हो?
बंटी: सर, आप उसे कुछ भी कह सकते हैं, उसे सुनाई तो देगा नहीं।
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आधी रात को (घबराई हुई) बीवी: उठो कोई चोर हमारे किचन में घुस आया है और मेरा बनाया हुआ केक खा रहा है।
पति (जम्हाई लेते हुए): किसको बुलाऊं, पुलिस को या एम्ब्यूलेंस को?
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अगर आप का बच्चा नाक या कान में उंगलियां करता रहता है तो उसका सीधा सा उपाय है। आप उसकी निक्कर की इलास्टिक निकाल दें, इससे उसके हाथ हर समय निक्कर को संभाले रखने में व्यस्त रहेंगे, और वो नाक या कान में उंगलियां नहीं कर पायेगा।
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कंजूस चेलारमानी की नई नवेली बीएमडब्ल्यू कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
पुलिस आयी और पुलिस वालों में से एक अफसर रोते हुए चेलारमानी को देखकर बोला -
मुझे समझ नहीं आता आप इतने परेशान क्यों हो रहे हैं? आप ने जब से दुर्घटना हुई है रो रो कर बुरा हाल कर लिया है? आप यह शुक्र क्यों नहीं मनाते कि आप इस दुर्घटना में जीवित बच गये हैं? आपके एक बाजू और हाथ कट गये तो क्या हुआ दूसरे तो सही सलामत हैं ना?
चेलारमानी ने फिर से दहाड़े मार मार कर रोना शुरू कर दिया। अब वो रोते हुए बार-बार हाय मेरी नई बीएमडब्ल्यू नहीं, कह रहा था। अब वो कह रहा था हाय मेरी नई रोलेक्स वॉच !!!
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डॉक्‍टर बीमार मरीज से: सर आपका और आपकी बीवी का ब्लड ग्रुप मैच करता है, आपको चढ़ाया जा सकता है।
मरीज: क्यों नही मैच करेगा डॉक्‍टर साहब, शादी के बाद 20 सालों से वो मेरा खून ही तो चूस रही है।

Tuesday, February 8, 2011

जीवन की मनुहार, अन्‍नुमलि‍क का प्‍यार, पहलवान की हकीकत, पंडि‍त संतराम की मुसीबत

डॉक्‍टर बंता से: बच्चे को उबाल कर पानी पिलाना।
बंता: बच्चे को उबालूंगा तो वो मर तो नहीं जायेगा?
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फिल्म में जीवन खलनायक था, हिरोईन को छेड़ते हुए बोला - जानेमन इस दिल में चली आओ?
हिरोईन - गुस्से से, सेंडिल उतारूं क्या?
जीवन - नहीं जानेमन मेरा दिल मंदिर-मस्जिद नहीं है ना, तुम सेंडिल पहनकर भी आ सकती हो।
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बेटे ने अन्नुमलिक से पूछा - पापा 2 और 12 जोड़ने पर कितने होते हैं?
अन्नुमलिक: गधे की औलाद, तुम नालायक ही रहोगे, इतने बड़े हो गये हो फिर भी तुम्हें कुछ नहीं आता, जाओ अन्दर से कैल्क्यूलेटर लेकर आओ।
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एक भिखारी ने डोमिनो पिज्जा हट वालों को आर्डर किया  - हैलो पिज्जा हट?
पिज्जा हट - यस सर कहिये हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं?
भिखारी - एक बड़ा पिज्जा, फिंगर्स और डेढ़ ली. की पेप्सी भेज दो।
पिज्जा हट- आर्डर किसके नाम से बनाकर, कहां भेज दूं सर?
भिखारी - अल्लाह के नाम पर, रेल्वे स्टेशन के सामने।
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दगड़ू पहलवान ने किस्सा सुनाया -
हमारी बस रात को एक जंगल से गुजर रही थी। मुझे पेशाब आया तो मैंने बस रूकवा ली और जंगल के अन्दर चला गया। मैं पेशाब करने ही वाला था कि सामने शेर आ गया।
श्रोता - तो फिर क्या हुआ?
दगड़ू पहलवान - फिर क्या होना था, मैंने शेर से कहा, मेरी तो निकल गई है, तुम्हें भी पेशाब वगैरह करनी है तो कर लो।

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एक दिन पत्नी मूड में थी... उसे संतराम पर प्यार आया तो उसका सिर गोद में रखकर सहलाते हुए उसने पूछा - कैसा लग रहा है जी?
पंडित संतराम - बस ऐसा लग रहा है मैं भगवान विष्णु हूँ और शेषनाग की शैया पर लेटा हुआ हूँ।

Thursday, February 3, 2011

खली के घर बच्‍चा और बच्‍चों की जि‍न्‍दगी


खली के घर में 10 साल बाद संतान हुई। बेटा पैदा हुआ। सारा परिवार खुश था। लोग बधाईयां गा रहे थे और मिठाईयां बांट रहे थे,  लेकिन खली का हाल ही और था ।
एक आदमी ने पूछा - भाई खली, इतने परेशान क्यों हो ? ऐसा लग रहा है बेटा पैदा होने की तुम्हें जरा भी खुशी नहीं।
खली बोला - एक तो दस साल बाद मेरी कोई औलाद हुई है, अब बच्चा हुआ है तो इतना छोटा .... बस बित्ते भर का, लोग कहीं मेरी बीवी पर शक ना करें कि ये बेटा मेरा ही है या....। मैं तो यही सोचकर परेशान हूं भाई।
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शिक्षक - अपने मां बाप का कहना मानोगे, उनके हिसाब से चलोगे
बच्चे - बिल्कुल मानंगे।
शिक्षक - बच्चों वचन दो की शराब, सिगरेट नहीं पियोगे।
बच्चे - नहीं पियेंगे
शिक्षक - स्कूल, कॉलेज बंक कर पिक्चर देखने या आवारागर्दी करने नहीं जाओगे।
बच्चे - नहीं जायेंगे।
शिक्षक - लड़कियों का पीछा नहीं करोगे, उन पर फब्तियां नहीं कसोगे।
बच्चे - नहीं करेंगे।
शिक्षक - समाज की सेवा करते हुए देश पर मर मिटोगे।
बच्चे - इतना सब आपके हिसाब से करने के बाद, जिन्दगी जीने लायक रह भी नहीं जायेगी, बिल्कुल मर मिटेंगे सर।

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जज - तुमने औरतों के सूट साड़ि‍यों की दुकान से कपड़े चुराये हैं, लेकि‍न तुमने कहा कि‍ तुम दुकान में 3 बार गये, ऐसा क्‍यों ?
 चोर - जज साहब, पहली दो बार में मैं जो सूट और साड़ि‍यां लेकर गया था, वो मेरी घरवाली को पसंद ही नहीं आये।

Saturday, January 22, 2011

स्‍मार्ट दादी, रोमांस का गणि‍त, चि‍कन का गीत, पुजारी का परहेज


दादी से पंगा कर देगा नंगा
अदालत में एक सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ब्रिजेश ने अपने पहले गवाह के रूप में एक बुजुर्गवार महिला को कटघरे में बुलाया। वकील उस बूढ़ी महिला के पास गये और बोले सुभद्रा देवी जी, क्या आप मुझे जानती हैं?
वो बूढ़ी बोली - क्यों नहीं बिट्टू, मैं तो तुम्हें तब से जानती हूं जब छोकरे से थे, लेकिन तुमने मुझे बहुत निराश किया। तुम बहुत ही झूठे हो, तुमने अपनी पत्नि से धोखा दगा किया, लोगों के साथ धोखा करते थे और दूसरों की पीठ पीछे बुराईयां करते थे। तुम समझते हो कि तुम बड़े चालाक हो, जब कि तुम्हारे पास धेले भर की अक्ल भी नहीं है।
वकील सन्न रह गया, उसे समझ में नहीं आया कि क्या करे? तो वह अपने विरोधी वकील की ओर मुड़ा और बोला- दादी जी क्या आप हमारे विरोधी वकील के बारे में कुछ जानती हैं?
वो बुढ़िया फिर बोली - क्यों नहीं, मैं इस रमेश को भी अच्छी तरह से जानती हूं। ये बचपन से ही अलाल टाईप का है, उपर से जैसे ही जवान हुआ इसने शराब पीनी शुरू कर दी। इसको तो लोगों से बात करने तक की तमीज नहीं है, मेरे ख्याल से ये हमारे जिले का सबसे घटिया वकील होगा। इसने भी अपनी घरवाली को छोड़, तीन अन्य औरतों से सम्बंध बनाये हुए हैं और इन तीन औरतों में..... बिट्टू एक तो तुम्हारी ही घरवाली है।
विरोधी पक्ष का वकील भी मरणासन्न सा उसकी ओर तकता ही रह गया।
यह सारा माजरा देखकर वहां बैठा जज बुरी तरह घबरा गया और बोला - तुम दोनों बदमाशों में से किसी ने भी इस बुढ़िया का रूख मेरी ओर किया तो मुझे तुम दोनों को मृत्यु देने की सजा की घोषणा करनी पड़ेगी।
शिक्षा: वकीलों को दादियों से पंगा नहीं लेना चाहिए।
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रोमांस का गणित
स्मार्ट आदमी +स्मार्ट औरत = रोमांस   
स्मार्ट आदमी +बेवकूफ औरत = अफेयर
बेवकूफ आदमी +स्मार्ट औरत = शादी
बेवकूफ आदमी +बेवकूफ औरत = ढेर सारे बच्चे
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दफ्तर का गणित
स्मार्ट बॉस +स्मार्ट कर्मचारी = कंपनी की प्रसिद्धि
स्मार्ट बॉस +बेवकूफ कर्मचारी = उत्पादन
बेवकूफ बॉस +स्मार्ट कर्मचारी = वेतनवृद्धि
बेवकूफ बॉस + बेवकूफ कर्मचारी = ओवरटाईम
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एक चिकन को जब हरी सब्जियों के साथ पकाया जाये तो वह कौन सा गाना गायेगा? 
"हम पे ये किसने..... हरा रंग डाला, 
मार डाला! मार डाला!!"
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ताजमहल को देखकर, शाहजहां का पोता बोला -
अपना भी क्या बैंक बैलेंस होता, यदि अपना दादा छिछोरा ना होता।

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पुजारी जी को दस्त लग गए. डॉक्टर के पास दवा लेने गए. डॉक्टर ने दवा दी.
पुजारी ने पूछा - "परहेज" क्या करूँ ?
डॉक्टर ने कहा - कुछ खास तो कुछ नहीं, बस शंख जोर से मत बजाना .......

Saturday, January 15, 2011

संता की सलवार, महंगाई का मीटर प्याज, टॉयलेटव्यापी भगवान

न्यूज चैनल देखता हुआ संता बहुत ही गुस्से में था, बोला -
अगर मुझे बस एक दिन के लिए प्रधानमंत्री की कुर्सी मिल जाये, तो मैं सारी सरकारी व्यवस्था को ठीक कर दूंगा।

सुनकर जीतो बोली - ये सब बाद में करते रहना, सुबह से मेरी सलवार पहनकर यहां वहां डोल रहे हो, पहले उसे उतार अपनी पेंट तो पहन लो।
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होटल में लंच के लिए बैठी सलमा अपनी सहेली से बोली - लगता है सामने के टेबल पर बैठा लड़का मोटी आसामी है, काफी अमीर है।
जीतो - क्यों - तुम्हें ऐसा क्यों लगा?
सलमा - अभी मैं उसके पास से निकली, तो उसके मुंह से प्याज की बू आ रही थी।
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पंडित बदरी के बेटे कजलू को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जा रहा था।
गुरू ने कहा - बेटा भगवान हर कहीं है, आस-पास, ऊपर नीचे, आगे पीेछे सब जगह भगवान है।
कजलू बोला - हां हां गुरूजी , भगवान टॉयलेट में भी होता है।
गुरू ने इस अजीब से वाक्य को सुन पूछा - वो कैसे?
कजलू - मेरे पिता जी सुबह सुबह जब भी पाखाने के लिए जाते हैं, जोर जोर से शोर मचाते हैं, आधा घंटा हो गया, कब तक इंतजार करूं, आफिस के लिए देरी हो रही है, .... हे भागवान अब तो निकल आओ। रोज यही सुनकर मेरी नींद खुल जाती है।
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नटवरलाल - मुझे शादी में सुसराल वालों ने बीएमडब्ल्यू दी है।
झुमरू - लेकिन हमें तो तुम्हारे घर में कार कहीं भी नजर नहीं आई।
नटवरलाल - क्यों मैंने तुम्हें अपनी नई नवेली बी.एम.डब्ल्यू. (बहुत मोटी वाईफ) से नहीं मिलवाया?

Monday, December 27, 2010

सेर को....सवा सेर


हनीमून से लौटकर सैफ अली बहुत परेशान थे।
सैफ के दोस्त ने पूछा क्या हुआ मियां - सब ठीक ठाक तो है। बड़े परेशान नजर आ रहे हो।
सैफ - बात ही कुछ ऐसी है यार।
दोस्त - क्यों क्या हुआ?
सैफ - सुहागरात के दूजे दिन जब मैं सुबह उठा तो गलती से, आदतन मैंने 1000 रू. उसके तकिये के नीचे रखे और होटल से बाहर आ गया। सिगरेट, चाय-पानी के बाद पता चला अरे मैं तो हनीमून पर आया हूं, ये शादी के बाद मेरा पहला दिन है। मैं वापस होटल लौटा कि वो कहीं बुरा ना मान जाये कि मैं उसे छोड़ सुबह सुबह कहां चला गया।
दोस्त - तो क्या हुआ?
सैफ - होना क्या था, उसने मुझसे कुछ नहीं कहा। वो तो नहा धोकर, सज-संवरकर, नाश्ता कर रही थी।
दोस्त - तो अच्छा हुआ ना, उसे पता ही नहीं चला कि तुमने उसके तकिये के नीचे 1000 रू. रखे थे।
सैफ - यही तो परेशानी की बात है यार, उसने तकिये के नीचे से 700 रू. तो निकाल लिये और 300 मुझे लौटा दिये, बोली - मैं पैसों के मामले में बहुत ही ईमानदार हूं।